स्वामी श्री परम्बानान्दनाथ सेवा संस्थान - आध्यात्मिक सेवाएं
वैदिक ज्योतिष का दिव्य विज्ञान और उसका जीवन पर प्रभाव वैदिक ज्योतिष, जिसे ज्योतिष शास्त्र भी कहा जाता है, प्राचीन भारत के वेदों का एक महत्वपूर्ण अंग है। यह विज्ञान आकाशीय पिंडों, नक्षत्रों और ग्रहों के पृथ्वी पर और विशेष रूप से मानव जीवन पर पड़ने वाले प्रभावों का सूक्ष्म अध्ययन करता है। जन्म के […]
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हस्तरेखा शास्त्र: हाथों की लकीरों में छुपा भविष्य हस्तरेखा शास्त्र (Palmistry) एक प्राचीन विज्ञान है जिसके द्वारा हाथों की लकीरों, पर्वतों, उंगलियों के आकार और हथेली के चिह्नों का अध्ययन करके मनुष्य के चरित्र, स्वभाव, करियर, स्वास्थ्य और भविष्य का फलादेश किया जाता है। हमारे हाथ की रेखाएं केवल चमड़ी की सिकुड़न नहीं हैं, बल्कि […]
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रमल शास्त्र: पासों के दिव्य संकेतों से सटीक फलादेश रमल शास्त्र एक अत्यंत प्राचीन और चमत्कारी ज्योतिष पद्धति है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसके द्वारा फलादेश करने के लिए जातक को अपनी जन्म तिथि, जन्म समय या कुंडली की आवश्यकता नहीं होती। रमल शास्त्र पूरी तरह से तत्कालीन प्रश्न, दिव्य ऊर्जा और […]
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तंत्र साधना: दिव्य शक्तियों का आवाहन और संरक्षण तंत्र साधना सनातन धर्म की एक परम रहस्यमयी और शक्तिशाली शाखा है। तंत्र का अर्थ है “तनु विस्तारे” – अर्थात् चेतना का विस्तार करना। यह साधना यंत्र, मंत्र, और विशिष्ट क्रियाओं के समन्वय से ब्रह्मांडीय ऊर्जा को अपने अनुकूल करने की विद्या है। तंत्र साधना का मुख्य […]
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योग एवं ध्यान: तन, मन और आत्मा का दिव्य मिलन योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं है, बल्कि यह जीवन जीने की एक पद्धति है। महर्षि पतंजलि के अनुसार “योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः” – अर्थात् मन की चंचल वृत्तियों को रोकना ही योग है। ध्यान (Meditation) योग का ही सर्वोच्च अंग है जो आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का […]
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रेकी हीलिंग: ब्रह्मांडीय प्राण ऊर्जा से चक्र संतुलन रेकी (Reiki) दो शब्दों से मिलकर बना है – “रे” (Rei) अर्थात् वैश्विक/ब्रह्मांडीय और “की” (Ki) अर्थात् प्राण ऊर्जा। यह एक स्पर्श चिकित्सा पद्धति है जिसमें हीलर ब्रह्मांडीय ऊर्जा को अपने हाथों के माध्यम से पीड़ित व्यक्ति के शरीर में प्रवाहित करता है। यह शरीर के सात […]
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वैदिक अंक ज्योतिष: अंकों का भाग्य पर प्रभाव अंक ज्योतिष (Numerology) वह विज्ञान है जो अंकों के स्पंदन और मानव जीवन के अंतर्संबंधों का अध्ययन करता है। वैदिक अंक ज्योतिष में प्रत्येक अंक (1 से 9) का संबंध किसी न किसी ग्रह से होता है। आपकी जन्म तिथि के मूलांक और भाग्यांक आपके जीवन के […]
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